भगवान खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, जो व्यक्ति को सभी दिशाओं से निराश हो चुका हो, खाटू श्याम उसकी परेशानी को दूर कर देते हैं। खाटू श्याम जी अपने भक्तों के लिए बहुत ही दयालु और कृपालु हैं। वे हमेशा अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। हर वर्ष, खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है इस आनंदमय दिन को देखने के लिए लोग दूर-दूर से खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।
Khatu Shyam Birthday 2023 | इस दिन मनाया जाएगा श्री खाटू श्याम का जन्मोत्सव
हिन्दू पंचांग के अनुसार श्री खाटू श्याम जी की जयंती प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसी दिन देवउठनी एकादशी भी पड़ती है। जो कि इस बार 23 नवंबर को पड रही है और इस दिन बहुत से लोग इस एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन भी करते है बाबा खाटू श्याम को कलयुग में भगवान कृष्ण के अवतार के रूप में जाना जाता है। खाटू श्याम बाबा के बारे में कहा जाता है जो भी इंसान बाबा के एक बार दर्शन कर लेता है उस इंसान के जीवन में आ रहे सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते है या अगर आप जीवन से हार या निराश हो गए है तो एक बार खाटू श्याम बाबा के दर्शन करने मात्र से आपके अंदर जीवन जीने की आशा जग जाती है। बाबा खाटू श्याम का मंदिर राजस्थान के सीकर में बना हुआ है। जहा लाखो भक्त खाटू श्याम बाबा के दर्शन करने के लिए आते है।
शास्त्रों के अनुसार, खाटू श्याम बाबा जी का संबंध महाभारत के काल से है। वे महाभारत के योद्धा भीम के पुत्र थे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री खाटू श्याम जी भगवान कृष्ण के कलियुगी अवतार माने जाते हैं और उनका वास्तविक नाम बर्बरीक था।
क्यों प्रसिद्ध है खाटू श्याम बाबा की कहानी?
महाभारत के युद्ध काल में, बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण से युद्ध में भाग लेने की अनुमति मांगी, लेकिन श्रीकृष्ण ने युद्ध का परिणाम जानते हुए उनसे दान मे उनका सिर मांगा। बर्बरीक ने बिना किसी देर के सिर को दान कर दिया और बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि कलियुग में तुम श्याम कहलाओगे। वरदान देने के बाद, उनके सिर को खाटू नगर (वर्तमान राजस्थान राज्य के सीकर जिला) में दफनाया गया था, इसलिए उन्हें खाटू श्याम बाबा कहा जाता है।